शनिवार, अक्टूबर 29, 2022

👰 दुल्हन 👰








दुल्हन का श्रृंगार किए प्रिय,
तुम्हारे पास में आऊंगी,
जब तुम देखोगे मुझे,
तो मैं खुद से शरमाऊंगी
बनकर तुम्हारी दुल्हन आज,
जन्नत मुझको मिल गई,
सोलह श्रृंगार किये मैंने,
तुमको मैं रिझा रही हूँ।
खनक रही है चूड़ी मेरे हाथों में,
पायल के घुंघरू तुम्हें बुलाते है।
हाथों में सजी मेहंदी तेरे नाम की,
प्रिय तुम्हें पास बुलाती है।
कितने सालों से इंतजार था मुझे,
कब आऊं सोलह श्रृंगार किये प्रिये,
मेरे श्रृंगार के सामने,
चांद की चांदनी भी फीकी लगती है,
आज मैं सोलह श्रृंगार करके,
खुद से शरमा रही हूं।
तुम्हारी मस्ती भरी आंखों से,
मैं अपने आप को निहार रही हूँ।
तुम जो सामने मेरे आए,
मैं खुद से शरमा रही हूं।।

✍️ गरिमा ( लखनऊ, उत्तर प्रदेश )

👰 श्रृंगार 👰








ये चूड़ी ये पायल 
ये नथनी ये झुमके 
उस पर ये कजरे की धार 
जब सज धज के कर सोलह श्रृंगार 
बहुत प्यारी लगती है नारी 
जब निकलती है घर से 
सर पर ओढ़े चुनर लाल 
श्रृंगार नारी का है सम्मान 
श्रृंगार नारी का है अधिकार 
श्रृंगार से नारी दिखती है प्यारी
श्रृंगार नारी का है आधार 
पूरे घर आंगन में छा जाती है 
खुशियों की बहार
चेहरे पर आती है मुस्कान 
श्रृंगार नारी का है अभिमान 
पर आजकल की भागदौड़ की दुनिया में
यह मुमकिन नही हो पाता है 
अब तो खुद को सजने संवारने का
मौका तभी मिल पाता है 
जब त्यौहार आता है।
                
✍️ सम्पदा ठाकुर ( मुंगेर, बिहार )

शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2022

👰 नारी और श्रृंगार 👰








श्रृंगार बिना स्त्री क्या

सदियों से सुनते आए हैं 

बिंदीचूड़ीनथसिंदूर आदि

स्त्री के हिस्से आए हैं 


ईश्वर की सुंदर रचना है

श्रृंगार से सजती आयी है 

इठलाती-इतराती नारी

कर सोलह श्रृंगार क़यामत ढायी है


पर हे स्त्री इक बात सुनो

नव-जीवन की नव-राह चुनो

माथे की बिंदिया संग आत्मविश्वा चुनो 

सूरज सा स्वयं में तेज़ गुनो


आँखों में भरते काजल संग

निराशा और भय को पोंछ हटा देना

निर्भयता को बनाना साथी तुम

गजरे संग आशा के फूल सजा लेना 


कंगना तो जंचते हैं तुम पर

हैं छेड़ते खन-खन मधुर तान

पर जब पड़े वक़्त उन हाथों में 

बेहिचक थामना तुम तलवार


पायल भी कितने मधुरम हैं

जो तुमने पावों में पहने हैं

उनकी मधुर छन-छन के संग

प्यारधैर्यममता भी तुम्हारे ही गहने हैं


टीका माथे पर सजता है 

मुख अद्भुत आभा से दमकता है

उस टीके का तुम मान बढ़ाना

निष्ठावचन पालन का प्रतीक उसे बनाना 


मेहंदी के मनभावन रंग संग 

रंग भरती जाना चहुं ओर

नथ पहन भी रण लड़ सकती हो

हो काल रात्रि या मनहर भोर 


दिखलाना इस जहाँ को सारे

जो सोलह श्रृंगार तुम करती हो

हो भीतर से भी उतनी सुंदर

अनुपम आभा से दमकती हो


और सुनो.. 

जब बांधना अपनी कमरधनी

संग कस कर बांधना ज़िम्मेदारी

और दिखलाना संसार को सारे

सुंदरताकोमलता संग 

वीरता का अद्भुत संगम है नारी 


✍️ भारती राय ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )

👰 मेहंदी का रंग 👰








छुपा लिया है चेहरा हथेलियों से जो,
जैसे बदली ने छिपा लिया है चांद को।
हाथों में रची मेहंदी का रंग कह रहा है,
कोई बड़ी शिद्दतों से चाहता है तुमको।।

इस मेहंदी से दोनो तरफ़ आग लगी है,
तलवों में उधर तो इधर दिल में लगी है।
नूर ऐसा निखर गया है इस दुल्हन का,
थाम कर चांद बैठा है जैसे चांदनी को।।

हाथों में रची मेहंदी का रंग कह रहा है,
कोई बड़ी शिद्दतों से चाहता है तुमको।।

हथेली पर सैर करती फूलों की डालियां,
कुछ पत्ते बेलबूटे सुर्ख गुलाबी कलियां।
उकेरी है मेहंदी इन हाथों पर प्यार से यूं,
गहराई प्यार की दिखने लगी है प्यार को।।

हाथों में रची मेहंदी का रंग कह रहा है,
कोई बड़ी शिद्दतों से चाहता है तुमको।।

 ✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )

गुरुवार, अक्टूबर 27, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित ऑनलाइन दीपावली विशेष साहित्यिक महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा पावन पर्व दीपावली के उपलक्ष्य में ऑनलाइन दीपावली विशेष साहित्यिक महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसका विषय 'दीपावली पर्व' रखा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होने एक से बढ़कर एक दीपावली के महत्व तथा विशेषता पर आधारित अपनी बेहतरीन रचनाओं को प्रस्तुत कर महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए। महोत्सव में भारती राय ( नोएडा, उत्तर प्रदेश ) और रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश ) की रचनाओं ने समूह का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। इस महोत्सव में सम्मिलित प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत साहित्य भास्कर' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने सभी देशवासियों को पावन पर्व दीपावली की बधाई दी और महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा सम्मान पाने वाले सभी प्रतिभागी रचनाकारों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने हिंदी रचनाकारों को समूह द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम भारती राय, रंजन लाल 'बेफिक्र', सम्पदा ठाकुर, गरिमा रचनाकारों के रहे।

सोमवार, अक्टूबर 24, 2022

💥 कैसे दिवाली मनाये 💥








हमने कहा प्रिय -
आओ दिवाली मनाये
खुशियों का रंग सबके
चेहरे पर ले आये
दिए की लौ से हर तरफ
अँधेरा दूर भगाये
जैसे ही दिया हमने जलाया
देखा दूर कहीं अँधेरा फैला है
और बच्चों की सिसकती आवाज़
मेरे दिल को भेद रही है
हम वहाँ गए तो देखा
करुण क्रन्दन हो रहा था
सब बैचेन थे कैसे दिवाली मनाये
जब पड़ोस में अँधेरा हो तो
प्रिय हम कैसे दिवाली मनाये
फिर दिए लाकर दिए हमने
और मिठाई से शुभ किया हमने
बच्चो को पटाखे दिए हमने
फिर भी दिल उदास है
कैसे मनाये दिवाली हम
माँ की आखो में वो सूनापन
क्या त्यौहार हमारे नही है
बच्चे दूध और अच्छा खाने को तरसे
तो प्रिय ऐसे में कैसे दिवाली मनाये हम

✍️ गरिमा ( लखनऊ, उत्तर प्रदेश )

रविवार, अक्टूबर 23, 2022

💥 दीपावली 💥









इस बार दीपावली ऐसी हो 
हुई पहले ना कभी जैसी हो 
ईर्ष्या, द्वेष के भाव मिटे 
मन से मन के दीप जले 
शत्रुता के भाव मिटा कर 
मित्रता के हाथ बढ़े 
वसुधैव कुटुंबकम् का 
हर तरफ उजियारा फैले 
गांव हो या हो शहर 
पूरे देश में हर तरफ 
भाईचारा फैले 
अपनत्व का दीया जब 
जलेगा सबके हृदय में 
झिलमिल करेगा फिर यह 
विश्वास की रोशनी हर घर में
रहेगा ना फिर किसी घर में अंधियारा 
हर तरफ फैलेगा प्रकाश 
जगमग करेगा यह जग सारा
ऐ काश ये ख्वाब मेरा पूरा हो 
इस बार दीपावली ऐसी हो 
हुई पहले ना कभी जैसी हो।

✍️ सम्पदा ठाकुर ( मुंगेर, बिहार )

शनिवार, अक्टूबर 22, 2022

💥 दीप जलाकर आया हूँ 💥







कुछ दीप जलाकर आया हूँ,
रूठों को मना कर आया हूँ,
अंतर्मन का तिमिर मिटाने,
बच्चो को हँसाकर आया हूँ।।

मन का दीपक तेल प्रेम का,
आशाओं की बाती बन कर,
राग द्वेष को आग लगाकर,
मन पावन सा कर आया हूँ।।

नाता तोड़ पटाखों से अब,
खुशियों की फूलझड़ी लेकर,
हर्षाने को हर चित्त प्रेम से,
कुछ गीत सुनाकर आया हूँ।।

कब तक छाएगा अंधेरा,
ओझल करने अब मंजिल को,
एक उजाले का सूरज मैं,
जीवन में उगाकर आया हूँ।।

हर घर धन धान्य से भरा हो,
कोई प्राणी उदास ना हो,
जगमग खुशियों से हो जीवन,
मन्नत ये सजाकर आया हूँ।।

✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )

शुक्रवार, अक्टूबर 21, 2022

💥 मेरे मन का वो दिया 💥








सुनो....

जब लाओगे दिए 

तो ले आना 

उम्मीदें और आशाएँ भी साथ

और 

उनकी बना पोटली 

टांग लेना मन के कोने में।


हाँ...

जब बांधोगे वो पोटली 

आशा और उम्मीदों की 

तो ले लेना नाम मेरा भी चुपके से

जब कभी खोल वो पोटली बैठोगे देखने 

तो क्षण भर को ही सही

पर चमक जाएगा नाम मेरा

महसूस कराते मेरी मौजूदगी....


फिर..

धुल लेना उन दियों को 

साथ में धुल डालना  

वो कड़वी स्मृतियाँ भी 

जो मिली होंगी तुम्हें कभी मुझसे

जाने या अनजाने..

ख़ाली रखना कोना

प्रेम संचय को...


अच्छा..

बाती तो बनाओगे ही...

बनाना मनोयोग से

मुस्कुराहट रख चेहरे पर

ऐसेजैसे बुन रहे हो ताना बाना

चलने वाले अनवरत जीवन का

जिसमें कुछ पल ही सही

पर हो वो पल हमारा 

पूरी तरह से

जिसमें होंगे हम दोनों

सजाए आँखों में एक ही स्वप्न..


जलाने को दिया 

जब रखोगे बाती दिए में

तो रख देना बात अपने मन की

साथ ही उसके 

और

उड़ेल देना अपने सारे जज़्बात

उसमें उड़ेलते हुए घी के साथ

फिर देखना..

उस की लौ

मचलती हुई ना जले तो कहना...


जब जलाओगे वो दिया

तो जला देना मन के अहंकार,

क्रोधलोभलालसा सब उसके साथ

फिर देखना...

कितना सुंदर है ये जीवन

हमारे सुंदर मन के जैसे...


पर हाँ...

सुनो

जला कर वो दिया,

रख लेना हथेली पर क्षण भर को

मानो रखा हो तुमने एहसास मेरे  का

और देख लेना आँखों में भरे स्ने

उड़ेल देना सारा भाव

सारा स्नेह…

और

रख देना वो दिया 

मंदिर के कोने में

जलने देना उसे 

जैसे भी वो चाहे जलना

उसकी मर्ज़ी...

उसके मन से...


✍️ भारती राय ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )


शनिवार, अक्टूबर 15, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' की प्रतिभागी शख्सियतें सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा महिला रचनाकार शख्सियतों के उत्साहवर्धन हेतु एवं उनके मन के भावों को आदर देने के उद्देश्य से ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। जिसमें महिला रचनाकारों को अलग-अलग विषयों के विकल्प देकर उसमें से किसी एक विषय का चयन करके उस विषय पर आधारित रचना लिखने के लिए कहा गया था। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों की महिला रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषयों पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से अपने मन के भावों को प्रस्तुत कर ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' की शोभा में चार चाँद लगा दिए। इस कार्यक्रम में समूह द्वारा अपने पिछले ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में मंच की शोभा बढ़ा चुकी महिला रचनाकारों को विशिष्ट साहित्यिक शख्सियत के तौर पर जोड़कर उन्हें ऑनलाइन 'पुनीत महिला गौरव' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' में प्रतिभागी रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा सम्मानित महिला रचनाकार शख्सियतों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने हिंदी रचनाकारों को आने वाले ऑनलाइन साहित्यिक महोत्सवों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम संध्या शर्मा, सुषमा पांडे, सीमा मोटवानी, राज सुराना रचनाकारों के रहे।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...