त्याग की मूर्ति है नारी
दया की खान है नारी
शक्ति का वरदान है नारी
तपती धूप में छांव है नारी
जीवन का आधार है नारी
धैर्य का प्रतीक है नारी
निःस्वार्थ स्नेह देती नारी
संस्कृति की नींव रखती नारी
घर की चारदीवारी को स्वर्ग बना देती है नारी
चूल्हे से चांद तक की यात्रा करती है नारी
दुर्गा बन राक्षसों का संहार करती है नारी
आंसू को हंसी में बदल देती है नारी
कर्तव्य को प्रतिज्ञा बना लेती है नारी
घर-आंगन की मुस्कान है नारी
अबला नही सबला है नारी
ईश्वर की अनमोल रचना नारी
हर उलझन सुलझा देती नारी
अंधेरे में उजाला बन जाती नारी
अपनी खुशियां भुला देती नारी
विघ्नों की ढाल बन जाती नारी
नारी में है विशेषता ही विशेषता
इसलिए सम्मान की अधिकारी है नारी
✍️ रत्ना वाधवानी ( भोपाल, मध्य प्रदेश )






